Jean-Marc Philippe
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रूपांतर

1970 के दशक में नासा ने अंतरिक्ष में ली गई छवियों की व्याख्या को सुगम बनाने के उद्देश्य से उन्हें व्यवस्थित ढंग से रंग प्रदान करने के लिए कलराइज़र (colorizer) नामक एक उपकरण विकसित किया। यह उपकरण कुछ वर्ष बाद यूरोप पहुँचा। तब ज़ाँ-मार्क फ़िलिप ने इस नई प्रौद्योगिकी को उसके मूल उद्देश्य से मोड़कर अपनी कलात्मक पद्धति में शामिल कर लिया।

उनके द्वारा विकसित प्रक्रियाओं में से एक में एक श्वेत-श्याम फ़ोटो को कैथोड-रे स्क्रीन पर प्रक्षेपित किया जाता था, ताकि छवि को उसकी घटक धूसर रंगतों में विभाजित किया जा सके। कलराइज़र की सहायता से वे उन्हें रंग प्रदान करते थे, फिर इलेक्ट्रॉनिक परिपथ में परिवर्तन करके वे तीव्रता, रंगतों और कंट्रास्ट को नियंत्रित कर पाते थे, जिससे वे संबंधित छवि को अनंत रूप से “विकृत” कर सकते थे।

एक एनालॉग कंप्यूटर से (डिजिटल युग से पहले) बनाई गई ये छवियाँ “तात्कालिक” थीं और केवल फ़िल्म कैमरे से स्वयं स्क्रीन की तस्वीर लेकर ही पुनरुत्पादित की जा सकती थीं।

1980 के दशक के मध्य में ज़ाँ-मार्क फ़िलिप ने अमेदेओ मोदिल्यानी के एक चित्र, विन्सेंट वान गॉग के एक आत्मचित्र और 16वीं सदी के बेनिन के एक मुखौटे के फ़ोटोग्राफ़िक पुनरुत्पादन से कृतियों की तीन शृंखलाएँ रचीं। उन्होंने छवियों की इन शृंखलाओं को “रूपांतर” नाम दिया।

सुनें
  • 9 मई 1985 — Musicomania, France Culture
    एक मुखौटे की शव-परीक्षा और विशाल आकाशीय चक्र

रिकॉर्डिंग © Radio France / INA और Radio suisse romande, दस्तावेज़ी प्रयोजन से उपलब्ध।

लेख

ज़ाँ-मार्क फ़िलिप द्वारा

ज़ाँ-मार्क फ़िलिप पर

संदर्भ और लिंक

पुस्तकें, कैटलॉग और पत्रिकाएँ

  • ज़ील तोर्दज्मान, “वीडियो में कलाकार का पोर्ट्रेट”, Revue d'esthétique, अंक 10 (“Vidéo-Vidéo”), Privat, 1986, पृ. 155-158।
  • फ़्रांस्वाज़ आर्मेंगो, Titres, पेरिस, Klincksieck, 1988, अध्याय “Jean-Marc Philippe”, पृ. 213-222।