
श्वेत कृति (Galerie Eolia का कैटलॉग)
Jean-Marc Philippe. Œuvres récentes 1976-1984 : l'Œuvre blanche, पेरिस, Galerie Eolia, “Les Cahiers Eolia” अंक 2, 1985।
देखें: विशाल आकाशीय चक्र, श्वेत कृतियाँ, चित्र
फ़्रांसीसी से अनूदित।
ज़ाँ-मार्क फ़िलिप
हालिया कृतियाँ 1976 - 1984
श्वेत कृति
Galerie Eolia 10, rue de Seine Paris VI 326 36 54
परिचयात्मक पाठ (फ़्रेंच)
अहस्ताक्षरित पाठ; कोई लेखक-नाम मुद्रित नहीं है।
ज़ाँ-मार्क फ़िलिप के कुछ चित्रों के सामने एक विचित्र अनुभूति आपको घेर लेती है। क्या आप देख रहे हैं, या इसके विपरीत आप स्वयं चित्र की ताक-झाँक के शिकार हैं?
ये आँखें, कारमेन की काली आँख या कब्र में कैन को देखती आँख की तरह, एक विचलित कर देने वाली, टटोलती हुई तीक्ष्णता लिए हैं। इन दृष्टियों पर हावी होने का प्रयास न करें, उन्हें बस सहज भाव से सहें। रेखाचित्रों के प्रेमी इन कृतियों को निहारने का आनंद लेंगे: निस्संदेह, कलाकार के पास उत्कृष्ट तकनीक है और कल्पना की कोई कमी नहीं।
चीनी स्याही में बने रेखाचित्रों की एक शृंखला, अकादमिक अवश्य, जिसकी परिप्रेक्ष्य-रेखाएँ अवकाश को संरचित करती हैं, इसका एक प्रमाण है।
“दृष्टियाँ” ज़ाँ-मार्क फ़िलिप की अधिक अंतर्मुखी प्रक्रिया को दर्शाती हैं। घोषणापत्रों की तरह, श्वेत कृतियाँ झकझोरती हैं, विचलित करती हैं, पर सबसे बढ़कर मोहित करती हैं: तब कला चीख बन जाती है, विद्रोह, संघर्ष, पर आशा भी। “विद्रोह उदात्त है,” ज़ाँ-मार्क फ़िलिप कहते हैं, “वह मनुष्य में किसी और चीज़ की चिंगारी है।” ज्यामितीय संदर्भ-चिह्नों के बीच विखंडित शरीर, एक रिक्त कैनवास में जहाँ यही रिक्तता बाँधे रखती है: तत्वों की विद्वत्तापूर्ण परिशुद्धता शास्त्रीय और समकालीन के साथ खेलती है; अतीत के संदर्भों के साथ, वर्तमान भविष्य से सटकर चलता है। कलाकार हमें एक दिक्-कालिक आयाम में उतार देते हैं जो चित्र की समस्या-भूमि को नया कर देता है।
“मुस्कानें”, अपेक्षाकृत हाल की और मानो शांत हो चुकी कृतियाँ, कोमलता व्यक्त करती हैं: पास-पास रखी पार्श्व-आकृतियों की, ऐंद्रिय रूप से अधखुले होंठों की, सदा प्रश्नाकुल आँखों की रूपात्मक मृदुता। यहाँ भी अनुपस्थितियाँ ही सारभूत हैं और हमारी भूमिका केवल सहभागी होने की है। अपूर्ण के ये सूक्ष्म और कोमल बिंब: इन मुस्कानों की पहेली, यदि आवश्यक हो, केवल हमारे भीतर ही सुलझती है। “चित्रकला,” मेर्लो-पोंती कहते हैं, “उसे दृश्य अस्तित्व प्रदान करती है जिसे साधारण दृष्टि अदृश्य मानती है; उसके कारण संसार की आयतनात्मकता पाने के लिए हमें ‘पेशीय इंद्रिय’ की आवश्यकता नहीं रहती”।
ये कृतियाँ कलाकार की एक साथ दार्शनिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम हैं। ज़ाँ-मार्क फ़िलिप कला और ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के अंतर्गुंफन का अध्ययन करते हैं। कला/विज्ञान: वे सदा अन्य प्रकृति के संकेतों के प्रति सजग रहते हैं। यदि वे शास्त्रीय विधियों का उपयोग करते हैं, तो नई प्रौद्योगिकियों का भी प्रयोग करते हैं और विभिन्न कलात्मक अवधारणाएँ विकसित करते हैं, जैसे, उदाहरण के लिए, 16वीं सदी के बेनिन के एक मुखौटे को लेकर कंप्यूटर-छवि-संसाधन की उनकी प्रक्रियाएँ। उनकी यह महत्वाकांक्षा भी है कि भूस्थिर उपग्रहों के माध्यम से पृथ्वी को तारों के एक वृत्त से घेर दें, जो एक प्रकार का आकाशीय चक्र रचेगा — एक ऐसी परियोजना जिसकी गूँज नासा तक पहुँची है।
इस प्रकार ज़ाँ-मार्क फ़िलिप हमारे सामने एक ऐसा कलात्मक चिंतन रखते हैं जो एक अभूतपूर्व, दीप्तिमान और सुसंगत आध्यात्मिकता को जन्म देता है, जिसे Galerie Eolia में “श्वेत कृति” के रूप में मूर्त रूप मिला है।
प्रमुख एकल और समूह प्रदर्शनियाँ
- 1970: Continental Art Gallery, न्यूयॉर्क
- 1971: Galerie Art du Monde, पेरिस
- 1973: Galerie Alexandre Iolas, पेरिस
- 1974: थेसालोनिकी का फ़्रांसीसी संस्थान (यूनान)
- 1975: Galerie Attali, पेरिस
- 1976 से 80 तक:
- FIAC पेरिस, ग्रां पैले, 1976-1977
- Kunst Messe, बासेल, 1976
- Art Fair, वॉशिंगटन, 1977
- Galerie Frédéric Gollong, सैं-पॉल-द-वांस
- आवालों संग्रहालय
- मलें संग्रहालय
- Centre Léonard-de-Vinci, बोर्दो
- पोम्पीदू केंद्र (C.C.I.)
- Galerie Attali, पेरिस
- 1981: एकल प्रदर्शनी (One Man Show), FIAC पेरिस, ग्रां पैले, “Les dix-neuf Regards ou l’Œuvre blanche”
- 1982 :
- प्रदर्शनी, ब्रसेल्स मुक्त विश्वविद्यालय (U.L.B.), ब्रसेल्स (मार्च-अप्रैल)
- प्रदर्शनी, Galerie Alexandra Monett, ब्रसेल्स, अक्टूबर/नवंबर
- प्रदर्शनी, Galerie France, बोर्दो, नवंबर/दिसंबर
- 1983 :
- प्रदर्शनी, Chosun Art Gallery, सोल (कोरिया), जून/जुलाई
- प्रदर्शनी “Art Expo”, Dallas Market Hall, टेक्सास, अक्टूबर
- प्रदर्शनी “Electra”, आधुनिक कला संग्रहालय, पेरिस, दिसंबर 83/फ़रवरी 1984, (एक परियोजना की प्रस्तुति के रूप में सहभागिता: “विशाल आकाशीय चक्र”)
- 1984 :
- न्यूयॉर्क अंतरराष्ट्रीय कला मेले में सहभागिता, अप्रैल
- तोक्यो, अप्रैल, Espace “New Otani”, “आकाशीय चक्र” की प्रस्तुति
- कला और तकनीक प्रदर्शनी “Phirama”, मार्सेई, अक्टूबर
- प्रदर्शनी एम. ओओका, तोक्यो, अनुरूप छवियाँ (दिसंबर)
- 1985: Galerie Eolia
ज़ाँ-मार्क फ़िलिप के लेखन
- प्रकाशक “Autrement”, LES IMMATÉRIAUX (मार्च 1985): “कलात्मक आविष्कार और उसका कायांतरण”
- पत्रिका “Spirale”, मई 1985 अंक: “सांस्कृतिक मैट्रिक्स और आविष्कार: एक कलात्मक यात्रा पर उनके प्रभाव”
- पत्रिका “Leonardo”, अक्टूबर 1985 अंक: “L’espace, une nouvelle dimension pour l’Art”
ज़ाँ-मार्क फ़िलिप की सहभागिता
- “Art, Science, Technologie” संगोष्ठी में, जिसका आयोजन Gulbekian Fondation ने “World Academy of Art and Science” और “विज्ञान, कला और साहित्य की यूरोपीय अकादमी” के तत्वावधान में किया, 22 और 23 फ़रवरी 1985, पेरिस।
- “Art, Science et Technique dans la modernité” संगोष्ठी में, पोम्पीदू केंद्र, 15 अप्रैल 1985, Revue parlée।
- “European Philosophy Conference” में, एथेंस, 24-28 जून 1985।
- प्रदर्शनी “L’Art contemporain français” (Fundaçâo Bienal de Sao-Paulo) में नए बिंबों का परिचय कराया, 7-14 मार्च 1985।
संगोष्ठियाँ और प्रकाशन
1971
- Denoël से सूचना-प्रौद्योगिकी और कलात्मक सृजन पर एक पुस्तक का सह-लेखक के रूप में प्रकाशन: “Les Cerveaux non-humains” [मानवेतर मस्तिष्क]
- नशीले पदार्थों और कलात्मक सृजन पर, तथा ध्वनियों के मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर वक्तव्य और लेख (सैंत-आन अस्पताल की संगोष्ठियाँ)।
- पत्रिका Nouveau Planète में लेख: “La Musique qui pense”
1982
- संगोष्ठी “Du Signe au Visage”, ब्रसेल्स मुक्त विश्वविद्यालय (17-18-19 मार्च)। वक्तव्य: “समकालीन कला में पश्चिमी समाज मनुष्य के जो निरूपण उत्पन्न करते हैं, उनके आधार पर इन समाजों के विषय में क्या सोचा जाए”
- कांग्रेस “Art et Mathématiques”, वेनिस (2-3-4 जून)। वक्तव्य: “क्या वैज्ञानिक चिंतन की विशिष्ट तर्क-पद्धतियाँ और कलात्मक अंतर्ज्ञान परस्पर संगत हैं? अंतरापृष्ठ”
- पत्रिका Spirale, अंक 20-21 में लेख: “विज्ञान और कला: एक नए प्रकार के संवाद की ओर”
1983
- पेरिस, सिस्टम विज्ञान और उसके अनुप्रयोगों पर अंतरराष्ट्रीय बैठक, पेरिस VII विश्वविद्यालय, 18-19-20 मई। वक्तव्य: “नई प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सिस्टम विज्ञान और कलात्मक सृजन के बीच एक संवाद की ओर”।
-
वेनिस, कांग्रेस “l’Art, la Banque et l’Industrie”, 1-2-3 जुलाई। वक्तव्य: “दीक्षात्मक छवि से नए बिंबों तक - सर्वव्यापकता और महत्व”।
-
पुस्तक (सह-लेखक के रूप में) का इतालवी में प्रकाशन: “Mathématica e Arte”, Spirali प्रकाशन।
- पत्रिका “H”, अंक 90 (नवंबर) में लेख, “Art et Informatique”।
- पत्रिका Spirale, अंक 30/31, नवंबर में लेख। “द्वितीय पुनर्जागरण या चेतना का पुनर्मोहन”।
- संगोष्ठी “La Techno-culture et la modernité”, आधुनिक कला संग्रहालय, पेरिस, दिसंबर।
1984
- तोक्यो, अप्रैल, कांग्रेस “D’où vient l’Orient, où va l’Occident” के अंतर्गत। वक्तव्य: “नई प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धि से प्रेरित सृजन-पद्धतियों का एक प्रारंभिक अध्ययन”।
- पत्रिका “L’Hyppocampe” में लेख, अप्रैल, आकाशीय चक्र।
- पत्रिका Spirale में लेख, “आकाशीय चक्र, 21वीं सदी के पैमाने का पिरामिड”, मई/जून।
- संगोष्ठी “Théâtre et Sciences de la Vie” में सहभागिता, जून। Maison de la Culture du Monde, कांग्रेस की कार्यवाही के लिए पाठ सहित (यूनेस्को प्रकाशन)।
- सिस्टम विज्ञान कांग्रेस, पेरिस VII विश्वविद्यालय, “अनुरूप छवियों की रचना पर लागू सिस्टम-सिद्धांत”, जून।
- मिलान, कांग्रेस “La Finance et la Culture”, नवंबर। वक्तव्य: “सांस्कृतिक मैट्रिक्स पर आविष्कार की भूमिका”।
जीवन-परिचय
ज़ाँ-मार्क फ़िलिप
जन्म 30 अक्टूबर 1939, फ़्रांसीसी।
1966 तक वे अपनी गतिविधि संगीत, विज्ञान और चित्रकला के बीच बाँटते हैं।
पहली एकल प्रदर्शनी 1967 में, फिर 1968/1969 में, न्यूयॉर्क और पेरिस में।
1971 में संयुक्त राज्य अमेरिका-प्रवास के कारण वे धब्बावादी (tachiste) अमूर्तन छोड़ देते हैं। तब वे अपनी चित्रकला को दैनिक जीवनानुभव से जोड़ने का प्रयास करते हैं, किंतु शीघ्र ही यह प्रतिरोधी पहलू लुप्त हो जाता है और उसका स्थान कैनवास का ऐसा निरलंकरण ले लेता है जो द्विवर्णता तक सीमित है और श्वेत संदर्भ-चिह्नों से अर्थान्वित है।
BENEZIT से उद्धृत।
संक्षिप्त ग्रंथसूची
लेख: अनिक पेली, ज़ेनेवियेव ब्रेरेत, आंद्रे पारिनो, ज़ील प्लाज़ी, एम.-सी. वोल्पाँ, देनी पिकार, एफ़.-आर. कोर्साकोफ़, ज़े.-एम. तासे, ज़ाक सोज़ेर, माकोतो ओओका।
मुद्रित कृतियाँ
1 — दृष्टि
2 — मुस्कान
3 — क्षणचित्र
4 — क्षणचित्र
5 — क्षणचित्र
6 — क्षणचित्र
7 — मुस्कान “ला बेल फ़ेरोनिएर”
8 — दृष्टि
9 — दृष्टि
10 — मुस्कान: ग्रांद ओडालिस्क की ओर एक इशारा
11 — मुस्कान
12 — दृष्टि
13 — मुस्कान
14 — दृष्टि
15 — मुस्कान
16 — दृष्टि
17 — दृष्टि
18 — मुस्कान
प्रकाशन-विवरण
कृतियों के छायाचित्र: दानिएल फ़्रास्ने
मुद्रण: LIS 33 - LIBOURNE - (56) 51.03.32
अभिकल्पना: दानिएल फ़्रास्ने और फ़्रांस्वाज़ फ़्रांसिस्की
प्रकाशन-निदेशिका: फ़्रांस्वाज़ फ़्रांसिस्की
© Eolia SA 1985
ISBN 2-905536-01-2
वैधानिक निक्षेप: जून 1985
मूल संस्करण से प्रतिलेखन (ज़ाँ-मार्क फ़िलिप अभिलेखागार), अधिकार-धारकों की सहमति से पुनर्प्रस्तुत।